Teacher's Day (5 September, 2026)

एक किताब, एक कलम, एक बच्चा और एक शिक्षक दुनिया बदल सकते हैं।
मलाला यूसुफजई

"Teachers should be the best mind in the country." - Dr. Sarvepalli Radhakrishnan

Dr. Sarvepalli Radhakrishnan: He was a philosopher, scholar, author, Bharat Ratna awardee and the the second President of India— was born on this day in 1888.. His birthday is celebrated as Teachers' Day since 1962, across the country.

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Interesting Facts about Dr. Sarvepalli Radhakrishnan on Teachers Day

1. Sarvepalli Radhakrishnan was born on 5 September, 1888 at Tiruttani in Tamil Nadu. His father and mother were Sarvepalli Veeraswami and Sitamma. His wife was Sivakamu, and he was the father of five daughters and one son.

2. Throughout his academic life, he was awarded scholarships. He joined Voorhees College in Vellore but later moved to the Madras Christian College at the age of 17. In 1906, he had completed his Master's degree in Philosophy and became a professor.

3. He was knighted in 1931 and since then till the attainment of Independence, he was addressed as Sir Sarvepalli Radhakrishnan. But after independence, he came to be known as Dr. Sarvepalli Radhakrishnan. In 1936, he was named as Spalding Professor of Eastern Religions and Ethics at the University of Oxford. Also, elected as the Fellow of the All Souls College.

4. He was elected to the Constituent Assembly in 1946. He served as ambassador to UNESCO and later to Moscow.

5. In 1952, he became the first Vice President of India and in 1962, he became the second President of independent India.

6. He was awarded Bharat Ratan in 1954 and in 1961 the Peace Prize of the German Book Trade. In 1963, he also received the Order of Merit and in 1975, the Templeton prize for promoting the notion of “a universal reality of God that embraced love and wisdom for all people”. And amazing is that he had donated the entire prize money to Oxford University.

7. To join the University of Calcutta, Dr. Radhakrishnan left Mysore University. The students of Mysore University took him to the station in a carriage that had been decorated with flowers.

8. From 1931-1936, he was the Vice-Chancellor at Andhra University, and from 1939-1948, he was the Vice-Chancellor at Banaras Hindu University. And at Delhi University, he was the Chancellor from 1953-1962.

9. Let us tell you that in the memory of Dr. Radhakrishnan, Oxford University started the Radhakrishnan Chevening Scholarships and the Radhakrishnan Memorial Award.

10. He had founded Helpage India, which is a non-profit organization for elderly and underprivileged people.

11. Since 1962, Teachers' Day in India is celebrated on 5 September every year to pay tribute to Dr. Sarvepalli Radhakrishnan on his birth anniversary.

12. One more thing which we can't forget about him is that when he became the President of India, he accepted only Rs 2500 out of Rs 10,000 salary and the remaining amount was donated to the Prime Minister's National Relief Fund every month.

13. He died on 17 April, 1975.

We can’t forget such a humble man who had devoted his entire life to promoting the value of education and also gave Indians a new sense of esteem by gracefully interpreting Indian thought in western terms.

Source:-https://www.jagranjosh.com/general-knowledge/dr-sarvepalli-radhakrishnan-interesting-facts-1567665761-1

Independence Day Celebration (15 August, 2026)

 

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WORLD BOOK DAY ( 23 APRIL 2026)

23 अप्रैल, विश्व पुस्तक दिवस: किताबों का सुंदर सजीला संसार
आज 23 अप्रैल, 2026 को पुस्तकालय, पीएम श्री के.वि. अलवर द्वारा विश्व पुस्तक दिवस (World Book Day) का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर आपको स्टडी मेटेरियल के साथ एक क्विज़ भी भेजी जा रही है। इस क्विज़ में भाग लेने वाले सभी सहभागियों को डिजिटल सर्टिफिकेट आपके द्वारा भरे गए ई-मेल पर भेज दिया जाएगा।
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23 अप्रैल 1564 को एक ऐसे लेखक ने दुनिया को अलविदा कहा थाजिनकी कृतियों का विश्व की समस्त भाषाओं में अनुवाद हुआ। यह लेखक था शेक्सपीयर। जिसने अपने जीवन काल में करीब 35 नाटक और 200 से अधिक कविताएँ लिखीं। साहित्य-जगत में शेक्सपीयर को जो स्थान प्राप्त है उसी को देखते हुए यूनेस्को ने 1995 से और भारत सरकार ने 2001 से इस दिन को विश्व पुस्तक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की।

'विश्व पुस्तक दिवसप्रत्येक वर्ष 23 अप्रैल को मनाया जाता है। इसे विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिवस का आयोजन संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक संगठनयूनेस्को (UNESCO) द्वारा किया जाता है। विश्व पुस्तक दिवस का आयोजन सर्वप्रथम 23 अप्रैल, 1995 मेँ किया गया था। 

पुस्तकें मनुष्य की सच्ची मित्र होती है। पुस्तकों से ही विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।पुस्तकें ज्ञान का भण्डार होती हैं। पुस्तकों से अच्छी शिक्षा ग्रहण करके जीवन को सफल बनाया जा सकता है।केवल विद्यार्थी ही नहीं वरन प्रत्येक मनुष्य को अच्छी पुस्तकें पढ़ने से लाभ प्राप्त होता है।पुस्तकों से हमारा ज्ञानतर्कशक्ति  बौद्धिक क्षमता बढ़ती है।

विश्व पुस्तक दिवस पर सार्वजनिक पुस्तकालय में पुस्तक प्रदर्शनी तथा पुस्तकों के महत्व पर परिचर्चा सहित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर पुस्तक से संबंधित अनेकानेक गतिविधियां होती हैं। जगह-जगह पुस्तकों के महत्व पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाता है और पुस्तकों के महत्व  उपयोगिता की ज्ञानवर्धक जानकारी दी जाती है। इस दिवस पर अनेक विद्यालयों मेँ पुस्तकों पर आधारित प्रश्नोत्तरी का आयोजन भी किया जाता है।

इतिहास
पहला विश्व पुस्तक दिवस 23 अप्रैल, 1995 को मनाया गया था। यूनेस्को ने यही तारीख तय की थी। इस तारीख के साथ खास बात यह है कि विलियम शेक्सपीयर समेत कई महान लेखकों की पुण्यतिथि और पैदाइश की सालगिरह है। विलियम शेक्सपीयर का निधन 23 अप्रैल, 1616 को हुआ था। स्पेन के विख्यात लेखकत मिगेल डे सरवांटिस (Miguel de Cervantes) का निधन भी इसी दिन हुआ था।

23 अप्रैल को ही क्यों?
इसे 23 अप्रैल को मनाने का विचार स्पेन की एक परंपरा से आया। स्पेन में हर साल 23 अप्रैल को 'रोज डे' मनाया जाता है। इस दिन लोग प्यार के इजहार के तौर पर एक-दूसरे को फूल देते हैं। 1926 में जब मिगेल डे सरवांटिस का निधन हुआ तो उस साल स्पेन के लोगों ने महान लेखक की याद में फूल की जगह किताबें बांटीं। स्पेन में यह परंपरा जारी रही जिससे विश्व पुस्तक दिवस मनाने का आइडिया आया।
सन्दर्भ स्त्रोत - https://navbharattimes.indiatimes.com/education/gk-update/why-world-book-day-is-celebrated-on-23-april/articleshow/69004265.cms

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Ambedkar Jayanti Celebration (14/04/2026)

👉 डॉ. भीम राव अम्बेडकर  के जीवन पर आधारित प्रश्नोंत्तरी  में भाग लेने हेतु दिए गए लिंक पर क्लिक करें  

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डॉ भीम राव आंबेडकर का जीवन परिचय - Life Sketch of Dr. Bhimrao Ambedkar

14 अप्रैल 2026 को देश 'भारत रत्न' 'संविधान निर्माता' बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की 136 वीं जयंती मनाएगा एक सामाजिक-राजनीतिक सुधारक के रूप में आंबेडकर की विरासत का आधुनिक भारत पर गहरा असर हुआ है। भारत के सामाजिक, आर्थिक नीतियों और कानूनी ढांचों में अगर आज कहीं भी प्रगतिशील बदलाव दिख रहे हैं तो इसके पीछे कहीं न कहीं आंबेडकर के वो विचार हैं जो उन्होंने 60 से 75 साल पहले दिए। कहने में कोई गुरेज नहीं कि डॉ. आंबेडकर के वे विचार आज भी प्रासंगिक हैं

👉 डॉ भीमराव अम्बेडकर से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ

*जन्म- भारत प्रांत (अब मध्य प्रदेश में) सैन्य छावनी “महू” में एक मराठी परिवार में हुआ था। वह रामजी मालोजी (ब्रिटिश सेना में सूबेदार) और भीमाबाई की 14 वीं संतान थे।
* भीमराव अम्बेडकर हिंदू “महार” जाति से संबंध रखते थे, जिसे समाज में अछूत जाति कहा जाता था। बचपन से ही भीमराव गौतम बुद्ध की शिक्षा से प्रभावित थे। पढ़ाई में सक्षम होने के बावजूद अनुसूचित जाति से संबंधित होने के कारण उन्हें सामाजिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ता था। 
* वर्ष 1897 में, भीमराव अपने परिवार साथ मुंबई चले गए और वहां एल्फिंस्टन हाई स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। जहां अम्बेडकर एक मात्र अस्पृश्य छात्र थे।
* अप्रैल 1906 में, जब वह 15 वर्ष के थे, तब उनका विवाह नौ वर्ष की लड़की रमाबाई से हुआ।
* वर्ष 1907 में, उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और अगले वर्ष एल्फिंस्टन कॉलेज में प्रवेश किया, जो कि बॉम्बे विश्वविद्यालय से संबंधित था और ऐसा करने वाले वह पहले अस्पृश्य छात्र बने। 
* वर्ष 1913 में, उन्हें सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय (बड़ौदा के गायकवाड़) द्वारा स्थापित एक योजना के तहत न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर शिक्षा के अवसर प्रदान करने हेतू तीन साल के लिए ₹755 प्रति माह बड़ौदा राज्य की छात्रवृत्ति प्रदान की गई थी। जिसके चलते 22 साल की उम्र में वह संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए।
* भीमराव अम्बेडकर जॉन डेवी के लोकतंत्र निर्माण कार्य से काफी प्रभावित थे।  9 मई को, उन्होंने मानव विज्ञानी अलेक्जेंडर गोल्डनवेइज़र द्वारा आयोजित एक सेमिनार में “भारत में जातियां: प्रणाली, उत्पत्ति और विकास” पर एक लेख प्रस्तुत किया, जो उनका पहला प्रकाशित कार्य था। 
* अक्टूबर 1916 में, डॉ॰ भीमराव अम्बेडकर लंदन चले गए और वहाँ “ग्रेज़ इन” में बैरिस्टर कोर्स (विधि अध्ययन) के लिए दाखिला लिया और साथ ही लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में दाखिला लिया। जहां उन्होंने अर्थशास्त्र की डॉक्टरेट थीसिस पर काम करना शुरू किया। जून 1917 में, वह अपना अध्ययन अस्थायी रूप से बीच में ही छोड़ कर भारत लौट आए।
* भारत लौटने पर भीमराव बड़ौदा राज्य के सेना सचिव के रूप में कार्य करने के लगे। जहां कुछ दिन बाद उन्हें पुनः भेदभाव का सामना करना पड़ा। अंत में, बाबा साहेब ने नौकरी छोड़ दी और एक निजी ट्यूटर और एक लेखाकार के रूप में काम करने लगे।
* वर्ष 1918 में, वह मुंबई में सिडेनहम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स में राजनीतिक अर्थव्यवस्था (Political Economy) के प्रोफेसर बने। जहां उनका अन्य प्रोफेसरों के साथ पानी पीने के जॉग को साझा करने पर विरोध किया गया।
* भारत सरकार अधिनियम 1919 को तैयार कर रही “साउथबरो समिति” के समक्ष जब भीमराव अम्बेडकर को गवाही देने के लिए आमंत्रित किया गया। तब अम्बेडकर ने दलितों और अन्य धार्मिक समुदायों के लिए पृथक निर्वाचिका (separate electorates) और आरक्षण देने की वकालत की।
* वर्ष 1920 में, उन्होंने मुंबई में साप्ताहिक “मूकनायक” के प्रकाशन का कार्य शुरू किया। जिसका इस्तेमाल अम्बेडकर रूढ़िवादी हिंदू राजनेताओं व जातीय भेदभाव से लड़ने के प्रति भारतीय राजनैतिक समुदाय की अनिच्छा की आलोचना करने के लिए करते थे।
* बॉम्बे हाईकोर्ट में कानून की प्रैक्टीस करते हुए, उन्होंने अस्पृश्यों की शिक्षा को बढ़ावा दिया। उनका पहला संगठित प्रयास “बहिष्कृत हितकारिणी सभा” की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक सुधार को बढ़ावा देना था। 
* वर्ष 1930 में, भीमराव अम्बेडकर ने कालाराम मंदिर सत्याग्रह को शुरू किया। जिसमें लगभग 15,000 स्वयंसेवको ने प्रतिभाग लिया था। यही-नहीं इस आंदोलन में जुलूस का नेतृत्व एक सैन्य बैंड ने किया था और उसमें एक स्काउट्स का बैच भी शामिल था। पहली बार पुरुष और महिलाएं भगवान का दर्शन अनुशासन में कर रहे थे। जब सभी आंदोलनकारी मंदिर के गेट तक पहुंचे, तो उन्हें गेट पर खड़े ब्राह्मण अधिकारियों द्वारा गेट बंद कर दिया गया। विरोध प्रदर्शन उग्र होने पर गेट को खोल दिया गया। जिसके परिणामस्वरूप दलितों को मंदिर में प्रवेश की इजाजत मिलने लगी। 
* वर्ष 1932 में, जब ब्रिटिशों ने अम्बेडकर के साथ सहमति व्यक्त करते हुए, अछूतों को “पृथक निर्वाचिका” देने की घोषणा की, तब महात्मा गांधी ने इसका विरोध करते हुए, पुणे की यरवदा सेंट्रल जेल में आमरण अनशन शुरु किया।
* वर्ष 1936 में, भीमराव अम्बेडकर ने “स्वतंत्र लेबर पार्टी” की स्थापना की, जिसने वर्ष 1937 में केन्द्रीय विधान सभा चुनावों मे 15 सीटें जीती थी।
* वर्ष 1941 और 1945 के बीच में उन्होंने बड़ी संख्या में बहुत सी विवादास्पद पुस्तकें और पर्चे प्रकाशित किए, जिनमे “थॉट्स ऑन पाकिस्तान” भी शामिल है। जिसमें वह मुस्लिम लीग के मुसलमानों के लिए एक अलग देश पाकिस्तान की मांग की आलोचना करते हैं। भीमराव अम्बेडकर इस्लाम और दक्षिण एशिया के रीतियों के भी बड़े आलोचक थे। उन्होने भारत विभाजन का तो पक्ष लिया, परन्तु मुस्लिमो में व्याप्त बाल विवाह की प्रथा और महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार की घोर निंदा की।
* 15 अगस्त 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार जब अस्तित्व मे आई तब उन्होंने भीमराव अम्बेडकर को देश के पहले कानून मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया।
* उसके बाद अम्बेडकर के द्वारा तैयार किए गए संविधान में व्यक्तिगत नागरिक स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी और सुरक्षा प्रदान की गई है, जिसमें धर्म की आजादी, अस्पृश्यता को खत्म करना, और भेदभाव के सभी रूपों का उल्लंघन करना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं के लिए व्यापक आर्थिक और सामाजिक अधिकारों के लिए तर्क दिया और अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के सदस्यों के लिए नागरिक सेवाओं, स्कूलों और कॉलेजों में नौकरियों के आरक्षण की व्यवस्था शुरू करने के लिए असेंबली का समर्थन जीता जो एक सकारात्मक कार्रवाई थी। 
*स्वतंत्र भारत में जब राष्ट्रीय ध्वज पर विचार विमर्श किया जा रहा था, वह भीमराव अम्बेडकर “सविंधान ड्राफ्टिंग कमेटी” के अध्यक्ष ही थे। जिन्होंने राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र का सुझाव दिया था। उन्हीं की बदौलत आज तिरंगे में अशोक चक्र प्रदर्शित होता है।
* अम्बेडकर ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 का विरोध किया, जिसमें जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा दिया गया था और उनकी इच्छाओं के खिलाफ संविधान में शामिल किया गया था।
* भीमराव अम्बेडकर के दूसरे शोध ग्रंथ ‘ब्रिटिश भारत में प्रांतीय वित्त का विकास’ के आधार पर देश में वित्त आयोग की स्थापना हुई।
* उन्होंने अर्थशास्त्र पर तीन पुस्तकें लिखीं: एडमिनिस्ट्रेशन एंड फाइनेंस ऑफ दी इस्ट इंडिया कंपनी, द इव्हॅल्युएशन ऑफ प्रोविंशियल फाइनेंस इन ब्रिटिश इंडिया, द प्रॉब्लम ऑफ़ द रूपी : इट्स ओरिजिन एंड इट्स सोल्युशन।
* वर्ष 1950 के दशक में भीमराव अम्बेडकर बौद्ध धर्म के प्रति आकर्षित हुए और बौद्ध भिक्षुओं के सम्मेलनों में भाग लेने के लिए श्रीलंका (तब सिलोन) गए। और 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर शहर में डॉ॰ भीमराव अम्बेडकर ने स्वयं और अपने समर्थकों के लिए एक औपचारिक सार्वजनिक धर्मांतरण समारोह का आयोजन किया। जिसमें सबसे पहले डॉ॰ अम्बेडकर ने अपनी पत्नी सविता एवं कुछ सहयोगियों के साथ भिक्षु महास्थवीर चंद्रमणी द्वारा पारंपरिक तरीके से त्रिरत्न और पंचशील को अपनाते हुए बौद्ध धर्म ग्रहण किया।
* 6 दिसम्बर 1956 को, अम्बेडकर का मधुमेह की लम्बी बीमारी से मृत्यु (महापरिनिर्वाण) दिल्ली में उनके घर में हो गई। हर साल 20 लाख से अधिक लोग उनकी जयंती (14 अप्रैल), महापरिनिर्वाण यानी पुण्यतिथि (6 दिसम्बर) और धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस (14 अक्टूबर) को चैत्यभूमि (मुंबई), दीक्षाभूमि (नागपूर) तथा भीम जन्मभूमि (महू) में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए इकट्ठे होते हैं।
* अम्बेडकर के अनुयायियों द्वारा उन्हें आदर एवं सम्मान से ‘बाबासाहब’ (मराठी: बाबासाहेब) कहा जाता है, जो एक मराठी वाक्यांश है जिसका अर्थ “पिता-साहब”, क्योंकि लाखों भारतीय उन्हें “महान मुक्तिदाता” मानते हैं।
* बाबा साहेब को सम्मान देते हुए कई सार्वजनिक संस्थानों एवं ग्यारह विश्वविद्यालयों के नाम उनके नाम पर रखे गए, जैसे कि :- डॉ॰ बाबासाहेब अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र, डॉ॰ बी॰आर॰ अम्बेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जालंधर, अम्बेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली, इत्यादि शामिल है।
* भीमराव को हिस्ट्री टीवी 18 और सीएनएन आईबीएन द्वारा वर्ष 2012 में आयोजित एक चुनाव सर्वेक्षण “द ग्रेटेस्ट इंडियन” (महानतम भारतीय) में सर्वाधिक मत प्राप्त हुए थे। जिसमें लगभग 2 करोड़ मत डाले गए थे, इसके आधार पर उन्हें उस समय का सबसे लोकप्रिय भारतीय व्यक्ति माना जाने लगा।
* वर्ष 2000 में, फिल्म निर्देशक जब्बार पटेल ने बाबा साहेब के जीवन चरित्र को प्रदर्शित करते हुए, एक फिल्म बनाई जिसका शीर्षक “डॉ॰ बाबासाहेब अम्बेडकर” था। 
* 14 अप्रैल 2015 को, गुगल ने अपने होमपेज डुडल के माध्यम से अम्बेडकर के 124 वें जन्मदिन का जश्न मनाया था। यह डूडल भारत, अर्जेंटीना, चिली, आयरलैंड, पेरू, पोलैंड, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम में दिखाया गया था।

Source:- https://hindi.starsunfolded.com/bhimrao-ramji-ambedkar-hindi/

👉डॉ बी. आर. अम्बेडकर के विचार :
• जीवन लम्बा होने की बजाय महान होना चाहिए।

• मैं किसी समुदाय की प्रगति, महिलाओं ने जो प्रगति हांसिल की है उससे मापता हूँ।

• एक सफल क्रांति के लिए सिर्फ असंतोष का होना पर्याप्त नहीं है। जिसकी आवश्यकता है वो है न्याय एवं राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों में गहरी आस्था।

• लोग और उनके धर्म सामाजिक मानकों द्वारा; सामजिक नैतिकता के आधार पर परखे जाने चाहिए। अगर धर्म को लोगो के भले के लिए आवशयक मान लिया जायेगा तो और किसी मानक का मतलब नहीं होगा।

• हमारे पास यह स्वतंत्रता किस लिए है ? हमारे पास ये स्वत्नत्रता इसलिए है ताकि हम अपने सामाजिक व्यवस्था, जो असमानता, भेद-भाव और अन्य चीजों से भरी है, जो हमारे मौलिक अधिकारों से टकराव में है को सुधार सकें।

• सागर में मिलकर अपनी पहचान खो देने वाली पानी की एक बूँद के विपरीत, इंसान जिस समाज में रहता है वहां अपनी पहचान नहीं खोता। इंसान का जीवन स्वतंत्र है। वो सिर्फ समाज के विकास के लिए नहीं पैदा हुआ है, बल्कि स्वयं के विकास के लिए पैदा हुआ है।

• आज  भारतीय  दो  अलग -अलग  विचारधाराओं  द्वारा  शोषित  हो  रहे  हैं . उनके  राजनीतिक  आदर्श  जो  संविधान  के  प्रस्तावना  में  इंगित  हैं  वो  स्वतंत्रता  , समानता , और  भाई -चारे को  स्थापित  करते  हैं . और  उनके  धर्म  में  समाहित  सामाजिक  आदर्श  इससे  इनकार  करते  हैं

• राजनीतिक  अत्याचार  सामाजिक  अत्याचार  की  तुलना  में  कुछ  भी  नहीं  है  और  एक  सुधारक  जो  समाज  को  खारिज  कर  देता  है  वो   सरकार  को  ख़ारिज  कर  देने  वाले   राजनीतिज्ञ  से  कहीं अधिक  साहसी  हैं

💁 डॉ बी. आर. अम्बेडकर का जीवन परिचय पढ़ने ले लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें
👉https://www.quickhindi.in/2020/04/dr-bhimrao-ambedkar-biography-in-hindi.html
👉 https://www.bharatdarshan.co.nz/magazine/article/child/170/ambedkar-biography.html
👉 https://www.1hindi.com/dr-bhimrao-ambedkar-life-history-hindi/

पुस्तकोपहार-उत्सव (Book Donation Drive 2025-26)

SAVE TREE - SAVE ENVIRONMENT - SAVE FUTURE 
पुस्तकालय प्रति वर्ष नए सत्र के प्रारम्भ में पुस्तक-उपहार-उत्सव मनाता है।
इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राएं अपनी पिछली कक्षाओं की पाठ्य-पुस्तकें एवं अन्य पाठ्य-सामग्री, जो की अच्छी स्थिति में हो, विद्यालय पुस्तकालय में उपहार स्वरुप जमा करवा देतें हे एवं अगली कक्षाओं की पुस्तकें यदि पुस्तकालय में उपलब्ध हों तो प्राप्त करतें हैं।विद्यालय पुस्तकालय की पुस्तकोपहार योजना निः शुल्क है इसका उद्देश्य अधिक से अधिक पेड़ों को कटने से बचाना है, क्योंकि कागज पेड़ों को काटकर ही बनाये जातें हैं दूसरे शब्दों में कह सकतें हैं की पुस्तकोपहार का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को बचाना है।
प्यारे बच्चों आप इस पुस्तक-उपहार उत्सव में अवश्य भाग लें एवं अनगिनत पेड़ों को कटने से बचाकर पर्यावरव संरक्षण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। आप पुस्तकें विद्यालय  पुस्तकालय में समयानुसार जमा करवा सकतें हैं।

              पुस्तकोपहार-उत्सव -एक झलक

 

👉पुस्तकें प्राप्त करने/जमा करवाने के पश्चत् दिए लिंक द्वारा आवश्यक सूचनाएं अवश्य दें

REPUBLIC DAY- 26 JANUARY 2026

26 जनवरी 2026 को भारत का 77वां गणतंत्र दिवस है।
India is celebrating its 77th Republic Day this year.

💁 LIBRARY PM SHRI KV1 ALWAR is organizing ONLINE QUIZ on Republic Day 2026. Click on the link to participate in the the quiz. 

*प्रश्नोत्तरी में भाग लेने पर आपको डिजिटल प्रमाण-पत्र दिए गए ई-मेल पर प्राप्त हो जाएगा।*

भारत में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाते हैं। आज के दिन ही साल 1950 में देश में संविधान लागू हुआ था। गणतंत्र दिवस हमें हमारे वीरों और उनके संघर्ष की याद दिलाता है। यह राष्ट्रीय गौरव का दिन है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजपथ पर भव्य गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन होता है। राष्ट्रपति तिरंगा झंडा फहराते हैं। राष्ट्रगान और ध्वजारोहण के साथ उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है। अशोक चक्र और कीर्ति चक्र जैसे महत्वपूर्ण सम्मान दिए जाते हैं। राजपथ पर निकलने वाली झांकियों में भारत की विविधता में एकता की झलक दिखती है। परेड में भारत की तीनों सेना- नौ सेनाथल सेना और वायु सेना की टुकड़ी शामिल होती हैं और सेना की ताकत दिखती है।

गणतंत्र दिवस से जुड़ी रोचक जानकारी

26 जनवरी 1950 को सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर भारत का संविधान लागू किया गया था। संविधान लागू होने के बाद हमारा देश भारत एक गणतंत्र देश बन गया। इस के मिनट बाद 10 बजकर 24 मिनट पर राजेंद्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। इस दिन पहली बार बतौर राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद बग्गी पर बैठकर राष्ट्रपति भवन से निकले थे।  

यह संविधान ही है जो भारत के सभी जाति और वर्ग के लोगों को एक दूसरे जोड़े रखता है। भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। साल, 11 महीने और 18 दिन में यह तैयार हुआ था। जय हिंद। संविधान को लागू करने के लिए 26 जनवरी का दिन इसलिए चुना गयाक्योंकि 1930 में इसी दिन कांग्रेस के अधिवेशन में भारत को पूर्ण स्वराज की घोषणा की गई थी।

तिरंगे से जुड़ी रोचक जानकारी

तिरंगे को 15 अगस्‍त 1947 और 26 जनवरी 1950 के बीच भारत के राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाया गया। इसके बाद भारतीय गणतंत्र ने इसे अपनाया। तिरंगे की चौड़ाई का अनुपात इसकी लंबाई के साथ 2 और 3 का है। सफेद पट्टी के मध्‍य में गहरे नीले रंग का एक चक्र है। यह चक्र अशोक की राजधानी के सारनाथ के शेर के स्‍तंभ पर बना हुआ है। भारत के संविधान को बनाने में दो साल और 11 महीने लगे। 1955 में गणतंत्र दिवस पर पहली परेड आयोजित की गई थी।

KVS Foundation Day 2025

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के. वि. सं. स्थापना दिवस पर आधारित प्रश्नोत्तरी में भाग लेने हेतु ऊपर दिए गए लिंक पर क्लिक करें

The 63rd Foundation Day of KVS will be celebrated in 15 DECEMBER 2025

💁 Library PM SHRI K.V. 1 Alwar is organising a Quiz on K.V.S. Foundation Day. All the Participants will get E-Certificate in your given e-mail.

 KVS believes in imparting knowledge/values and nurturing talent, enthusiasm and creativity of its students for seeking excellence through high quality educational endeavors.

VISION - World Class Education Group

Kendriya Vidyalaya is not just a School, it is an Emotion. 

You can literally feel it oozing out of Kvians when they talk…Abhra Nil

Key Details:

Date: December 15, 1963 (Foundation) / December 15, 2025 (63rd Year).

Significance: A day to reflect on KVS's journey from 20 schools to a vast network, fostering national unity and academic excellence.

Activities: Schools organize events, honoring past achievements, celebrating growth, and connecting with the "Mini India" spirit within KVS. 

National Library Week (14-20 November, 2025)


राष्ट्रीय पुस्तकालय सप्ताह  पर आधारित प्रश्नोत्तरी में भाग लेने हेतु दिए गए लिंक पर क्लिक करें

👉https://forms.gle/pnC9BhxFYPmVgPRT7

डिजिटल प्रमाण-पत्र आपके द्वारा दिये गए ई-मेल पर भेज दिया जाएगा-

💁National Library Week 2025 THEME: -"Ready, Set, Library!"

The theme for National Library Week 2024, "Drawn to the Library"!" 

The theme for National Library Week 2025 was "Drawn to the Library". This theme celebrated the many reasons people are drawn to libraries, highlighting them as centers for information, creativity, and community, and was observed from November 14-20, 2025.

Aim of National Library Week Celebrated in India

Bringing awareness among the readers, students, teachers about the importance of libraries in acquiring knowledge and information.

National Library Week is celebrated from 14th-20th November every year. Special morning assembly programmes and different competitions are organized in connection with National Library Week. On this auspicious occasion some presentations related to the library, has been presented by the students and teachers in Morning Assembly as well as library with the help of Reader’s Club. The celebration of National Library Week is a way to promote the joy of reading, appreciate the importance of the library services among children by bringing their school libraries into the spotlight.

Ayyanki Venkata Ramanaiah, who is recognized as “The Architect of Public Library

Movement in India”, states that the 1912 meeting in Madras led to the forming of the Indian Library Association. The ILA is said to have declared 14 November as the National Library Day since 1968. 14th to 20th November is being celebrated as the National Library Week all over India and various programs are held to enhance readers’ awareness about libraries.